दक्षिण एशिया में सआदत हसन मंटो और फैज़ अहमद फैज़ सब से ज़्यादा पढ़े जाने वाले लेखक है.
पिछले सत्तर साल में मंटो की किताबों की मांग लगातार रही है. एक तरह से वह घर-घर में जाना जाने वाला नाम बन गया है.
उनके सम्पूर्ण लेखन की किताबों की जिल्दें लगातार छपती रहती हैं, बार-बार छपती हैं और बिक जाती हैं.
यह भी सचाई है कि मंटो और पाबंदियों का चोली-दमन का साथ रहा है. हर बार उन पर फाहशी (लचर) होने का इल्ज़ाम लगता रहा है और पाबंदियां लगाई जाती हैं.
'ठंडा ग़ोश्त', 'काली सलवार' और 'बू' नाम की कहानियों पर पाबंदिया लगाई गई. उनकी कहानियों को पाबंदियों ने और भी मक़बूल किया. मंटो को बतौर कहानीकार पाबंदियों का फ़ायदा हुआ. मंटो की कहानिओं पर पांच बार पाबंदी लगी पर उन्हें कभी दोषी क़रार नहीं दिया गया.
अब एक तरफ नंदिता दास की नई फिल्म 'मंटो पर पाकिस्तान में पाबंदी लगाई गई है और दूसरी तरफ लाहौर के सांस्कृतिक केंद्र अलहमरा ने 'मंटो मेला' पर पाबंदी लगा दी है.
13 जनवरी को लाहौर आर्ट्स कॉउन्सिल-अलहमरा ने अपने फेसबुक पन्ने पर नेशन अख़बार की ख़बर साझा की है जिसके मुताबिक 'मंटो मेला' फरवरी के बीच वाले हफ्ते में होने वाला था.
यह भी चर्चा है कि इस पाबंदी का कारण मिनिस्ट्री ऑफ़ कल्चर में मजहबी इंतहापसंदों का प्रभाव है. उनका मानना है कि लेखक की कृतियां लचरता फ़ैलाने का कारण है.
लोगों के दवाब के कारण अलहमरा ने इस मेले को पाबन्दी लगाने की बजाए सिर्फ़ आगे बढ़ाने की दलील दी है लेकिन अभी तक किसी तारीख का ऐलान नहीं हुआ.
इस मंटो मेले पर चार नाटक मंडलियों द्वारा नाटक किए जाने थे जिनमें पाकिस्तान का विश्व ख्याति प्राप्त 'अजोका थिएटर' है. यह सारी नाटक मंडलियां कई दिनों से मंच अभ्यास कर रही थीं.
नंदिता दास की फ़िल्म पर पाबंदी लगाने के बारे में यही दलील सामने आई है कि बोर्ड को कोई एतराज़ नहीं था पर फ़िल्म में हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे का 'सही चित्रण' नहीं है. अब फ़िल्म नेटफ्लिक्स पर मौजूद है और इसे कोई भी देख सकता है.
इस फ़िल्म पर पाबंदी के ख़िलाफ़ लाहौर, पेशावर और मुलतान में विरोध प्रदर्शन हुए हैं.
लाहौर में विरोध प्रदर्शन मंटो मेमोरियल सोसाइटी के प्रधान सईद अहमद और दूसरे बुद्धिजीवियों ने साथ मिलकर किया. उन्होंने बीते सप्ताह में एकअदबी समागम मंटो फ़िल्म के लिए ही किया था.
इस समागम में शिरकत करते हुए इतिहासकार आयशा जलाल ने अहम मुद्दे रखे. आयशा जलाल मशहूर इतिहासकार हैं और उनकी कई किताबें बहुत अहम मानी जाती हैं.
आयशा मंटो की रिश्तेदार भी हैं और उन्होंने मंटो और भारत -पाक बंटवारे के बारे में किताब भी लिखी है. उनसे पूछा गया कि सत्तर साल में क्या बदला है क्योंकि तब भी मंटो पर विवाद था और अब भी है.
फ़िल्म के बारे में बात करते हुए उन्होंने पाकिस्तान में बनाई गई सरमद खूसट की फ़िल्म की भी बात की और कहा कि नंदिता दास की फ़िल्म इतिहास के हिसाब से बेहतर है. उन्होंने कहा कि बेशक फ़िल्म पर पाबंदी लगाई गई है पर यह नेट पर उपलब्ध है तो पाबंदी की कोई तुक नहीं बनती.
आयशा जलाल ने कहा कि बंटवारे की सामाजिक आलोचना इससे अलग मामला है. अगर किसी को आलोचना बर्दाश्त नहीं है तो इसमें मंटो का कोई कसूर नहीं है.
बल्कि यह उनका मामला है या उनकी साहित्य के बारे में समझ का मामला है.
आयशा का कहना है कि अभी का प्रसंग बिलकुल अलग है पर मंटो पर कई बार इल्ज़ाम लगे हैं पर उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा कुछ जुर्माना ही हुआ है.
उस समागम में यह भी बात हुई कि मंटो को नाखुश दिखाया गया है और उसका पाकिस्तान में आने का अनुभव भी अच्छा नहीं था.
Thursday, January 17, 2019
Wednesday, January 9, 2019
जेफ़ बेज़ोस: दुनिया के सबसे अमीर आदमी का तलाक़
इस बयान में लिखा गया है, ''लंबे दौर तक एक-दूसरे के साथ प्रेम से रहने और फिर कुछ वक़्त के लिए दूरियों का अनुभव करने के बाद हमने एक दूसरे को तलाक़ देने का फ़ैसला किया है. हम दोनों अच्छे दोस्त बनकर रहेंगे.''
हाल ही में अमेज़न कंपनी ने एक बेहतरीन उपलब्धि अपने नाम की थी. अमेज़न माइक्रोसॉफ़्ट को पछाड़ते हुए दुनिया की सबसे ज़्यादा कीमत वाली कंपनी बन गई थी.
54 साल के जेफ़ ने 25 साल पहले अमेज़न कंपनी की शुरुआत की थी. ब्लूमबर्ग में अमीर लोगों की सूची में जेफ़ सबसे ऊपर आते हैं. उनके पास कुल 137 बिलियन डॉलर की संपत्ति बताई जाती है.
दूसरी तरफ़ 48 वर्षीय मैकेन्ज़ी एक साहित्यकार हैं. उन्होंने दो किताबें लिखी हैं. जिसमें साल 2005 में आई द टेस्टिंग ऑफ़ लूथर और साल 2013 में आई ट्रैप्स शामिल हैं.
अपने साझा बयान में इस जोड़े ने लिखा है, ''हम दोनों अपने आप को बहुत ख़ुशकिस्मत मानते हैं कि हमें एक-दूसरे का साथ मिला. हमने शादी के बाद इतने साल साथ में गुज़ारे इसके लिए हम एक-दूसरे के दिल से आभारी हैं.''
एशिया का वो देश जो रातों-रात 'अमीर' बन गया
एशिया के सबसे अमीर अरबपति कौन हैं
''हमने साथ में एक बेहतरीन ज़िंदगी गुज़ारी. हमने शादीशुदा जोड़े के तौर पर अपने भविष्य के सपने संजोए, हमने अच्छे माता-पिता, दोस्त और साथी के तौर पर अपनी-अपनी भूमिकाएं निभाईं. कई प्रोजेक्ट पर साथ में काम किया जिसमें हमें बहुत मज़ा भी आया.''
''अब भले ही हमारे रिश्ते का नाम बदल जाएगा लेकिन फिर भी हम एक परिवार रहेंगे, हम एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बनकर रहेंगे.''
पिछले साल इस जोड़े ने एक चैरिटी कार्यक्रम की शुरुआत की थी. इस कार्यक्रम का नाम द डे वन था. इस कार्यक्रम का मक़सद बेघर परिवारों की मदद करना और ग़रीब बच्चों के लिए स्कूलों का निर्माण करना था.
जेफ़ और मैकेन्ज़ी के चार बच्चे हैं. तीन लड़के और एक गोद ली हुई लड़की. साल 2013 में मैकेन्जी ने वोग पत्रिका को बताया था कि जेफ़ से उनकी मुलाक़ात नौकरी के एक इंटरव्यू के दौरान हुई थी. जेफ़ उस समय इंटरव्यू ले रहे थे.
तीन महीने तक एक-दूसरे के साथ वक़्त बिताने के बाद उन्होंने साल 1993 में शादी कर ली थी.
इसके एक साल बाद जेफ़ ने अमेज़न कंपनी की शुरुआत की. उस समय अमेज़न पर सिर्फ़ किताबों की ऑनलाइन बिक्री होती थी.
धीरे-धीरे इस कंपनी का विस्तार होता चला गया और यह दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी बन गई.
इस हफ्ते जब सोमवार को अमरीका का स्टॉक मार्केट बंद हुआ था तो अमेज़न की कुल कीमत 797 बिलियन डॉलर थी, जबकि उसी समय माइक्रोसॉफ़्ट की कीमत 789 बिलियन डॉलर थी.
हाल ही में अमेज़न कंपनी ने एक बेहतरीन उपलब्धि अपने नाम की थी. अमेज़न माइक्रोसॉफ़्ट को पछाड़ते हुए दुनिया की सबसे ज़्यादा कीमत वाली कंपनी बन गई थी.
54 साल के जेफ़ ने 25 साल पहले अमेज़न कंपनी की शुरुआत की थी. ब्लूमबर्ग में अमीर लोगों की सूची में जेफ़ सबसे ऊपर आते हैं. उनके पास कुल 137 बिलियन डॉलर की संपत्ति बताई जाती है.
दूसरी तरफ़ 48 वर्षीय मैकेन्ज़ी एक साहित्यकार हैं. उन्होंने दो किताबें लिखी हैं. जिसमें साल 2005 में आई द टेस्टिंग ऑफ़ लूथर और साल 2013 में आई ट्रैप्स शामिल हैं.
अपने साझा बयान में इस जोड़े ने लिखा है, ''हम दोनों अपने आप को बहुत ख़ुशकिस्मत मानते हैं कि हमें एक-दूसरे का साथ मिला. हमने शादी के बाद इतने साल साथ में गुज़ारे इसके लिए हम एक-दूसरे के दिल से आभारी हैं.''
एशिया का वो देश जो रातों-रात 'अमीर' बन गया
एशिया के सबसे अमीर अरबपति कौन हैं
''हमने साथ में एक बेहतरीन ज़िंदगी गुज़ारी. हमने शादीशुदा जोड़े के तौर पर अपने भविष्य के सपने संजोए, हमने अच्छे माता-पिता, दोस्त और साथी के तौर पर अपनी-अपनी भूमिकाएं निभाईं. कई प्रोजेक्ट पर साथ में काम किया जिसमें हमें बहुत मज़ा भी आया.''
''अब भले ही हमारे रिश्ते का नाम बदल जाएगा लेकिन फिर भी हम एक परिवार रहेंगे, हम एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बनकर रहेंगे.''
पिछले साल इस जोड़े ने एक चैरिटी कार्यक्रम की शुरुआत की थी. इस कार्यक्रम का नाम द डे वन था. इस कार्यक्रम का मक़सद बेघर परिवारों की मदद करना और ग़रीब बच्चों के लिए स्कूलों का निर्माण करना था.
जेफ़ और मैकेन्ज़ी के चार बच्चे हैं. तीन लड़के और एक गोद ली हुई लड़की. साल 2013 में मैकेन्जी ने वोग पत्रिका को बताया था कि जेफ़ से उनकी मुलाक़ात नौकरी के एक इंटरव्यू के दौरान हुई थी. जेफ़ उस समय इंटरव्यू ले रहे थे.
तीन महीने तक एक-दूसरे के साथ वक़्त बिताने के बाद उन्होंने साल 1993 में शादी कर ली थी.
इसके एक साल बाद जेफ़ ने अमेज़न कंपनी की शुरुआत की. उस समय अमेज़न पर सिर्फ़ किताबों की ऑनलाइन बिक्री होती थी.
धीरे-धीरे इस कंपनी का विस्तार होता चला गया और यह दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी बन गई.
इस हफ्ते जब सोमवार को अमरीका का स्टॉक मार्केट बंद हुआ था तो अमेज़न की कुल कीमत 797 बिलियन डॉलर थी, जबकि उसी समय माइक्रोसॉफ़्ट की कीमत 789 बिलियन डॉलर थी.
Wednesday, January 2, 2019
शी जिनपिंग ने कहा- ताइवान को चीन से मिलना ही होगा
चीन के राष्ट्रपति शीन जिनपिंग ने ताइवान के लोगों से कहा है कि वे इस बात को स्वीकार कर लें कि ताइवान को चीन के साथ 'मिलना होगा' और यह 'मिलकर ही रहेगा.'
ताइवान के साथ रिश्ते सुधारने की पहल के 40 साल पूरे होने पर दिए गए भाषण में जिनपिंग ने दोहराया कि चीन 'एक देश दो प्रणालियों' वाली व्यवस्था के तहत शांतिपूर्ण एकीकरण चाहता है.
उन्होंने चेताया भी कि चीन के पास 'शक्ति इस्तेमाल करने का अधिकार' है. हालांकि, ताइवान स्वयं शासित और वास्तविक रूप से स्वतंत्र है लेकिन उसने कभी यह आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया है कि वह चीन से स्वतंत्र है.
ताइवान को चीन अपने से अलग हुआ हिस्सा मानता है. ऐसे में जिनपिंग का बयान चीन की ताइवान को ख़ुद से मिलाने की पुरानी नीति के अनुरूप ही है.
जिनपिंग ने कहा कि दोनों पक्ष एक ही चीनी परिवार के हिस्से हैं और ताइवानी लोगों को 'यह समझना चाहिए कि स्वतंत्रता केवल मुश्किलें लेकर आएगी.' उन्होंने चेताते हुए कहा कि ताइवानी स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की किसी भी गतिविधि को चीन बर्दाश्त नहीं करेगा.
इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ताइवान के साथ उसके संबंध 'चीन की घरेलू राजनीति का हिस्सा हैं' और इसमें 'विदेशी दख़ल बर्दाश्त नहीं है.'
ताइवान का क्या मानना है?
बुधवार को ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने कहा कि उनका देश चीन की शर्तों के आधार पर कभी एकीकरण के लिए तैयार नहीं होगा.
जिनपिंग के भाषण से एक दिन पहले ताइवान की राष्ट्रपति ने कहा था कि चीन को ताइवान के अस्तित्व को स्वीकार करना चाहिए और मतभेदों को सुलझाने के लिए शांतिपूर्ण साधनों का उपयोग करना चाहिए.
साई ने कहा, "मैं चीन से कहना चाहती हूं कि वह ताइवान में चीनी गणराज्य के अस्तित्व की वास्तविकता का सामना करें."
उन्होंने कहा कि चीन को 2.3 करोड़ लोगों की स्वतंत्रता और लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए और शांतिपूर्ण तरीक़े से मतभेदों को सुलझाना चाहिए.
नवंबर में साई की राजनीतिक पार्टी को क्षेत्रीय चुनावों में भारी झटका लगा था. चीन मानता है कि यह उसके अलगाववादी रुख़ के कारण हुआ था.
क्या चीन और अमरीका के बीच छिड़ चुका है नया शीत युद्ध?
चीन की इस कंपनी से क्यों डर रहा है अमरीका
क्या है विवाद की वजह
'पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना' और 'रिपब्लिक ऑफ़ चाइना' एक-दूसरे की संप्रभुता को मान्यता नहीं देते. दोनों ख़ुद को आधिकारिक चीन मानते हुए मेनलैंड चाइना और ताइवान द्वीप का आधिकारिक प्रतिनिधि होने का दावा करते रहे हैं.
जिसे हम चीन कहते हैं उसका आधिकारिक नाम है 'पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना' और जिसे ताइवान के नाम से जानते हैं, उसका अपना आधिकारिक नाम है 'रिपब्लिक ऑफ़ चाइना.' दोनों के नाम में चाइना जुड़ा हुआ है.
व्यावहारिक तौर पर ताइवान ऐसा द्वीप है जो 1950 से ही स्वतंत्र रहा है. मगर चीन इसे अपना विद्रोही राज्य मानता है. एक ओर जहां ताइवान ख़ुद को स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र मानता है, वहीं चीन का मानना है कि ताइवान को चीन में शामिल होना चाहिए और फिर इसके लिए चाहे बल प्रयोग ही क्यों न करना पड़े
ताइवान के साथ रिश्ते सुधारने की पहल के 40 साल पूरे होने पर दिए गए भाषण में जिनपिंग ने दोहराया कि चीन 'एक देश दो प्रणालियों' वाली व्यवस्था के तहत शांतिपूर्ण एकीकरण चाहता है.
उन्होंने चेताया भी कि चीन के पास 'शक्ति इस्तेमाल करने का अधिकार' है. हालांकि, ताइवान स्वयं शासित और वास्तविक रूप से स्वतंत्र है लेकिन उसने कभी यह आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया है कि वह चीन से स्वतंत्र है.
ताइवान को चीन अपने से अलग हुआ हिस्सा मानता है. ऐसे में जिनपिंग का बयान चीन की ताइवान को ख़ुद से मिलाने की पुरानी नीति के अनुरूप ही है.
जिनपिंग ने कहा कि दोनों पक्ष एक ही चीनी परिवार के हिस्से हैं और ताइवानी लोगों को 'यह समझना चाहिए कि स्वतंत्रता केवल मुश्किलें लेकर आएगी.' उन्होंने चेताते हुए कहा कि ताइवानी स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की किसी भी गतिविधि को चीन बर्दाश्त नहीं करेगा.
इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ताइवान के साथ उसके संबंध 'चीन की घरेलू राजनीति का हिस्सा हैं' और इसमें 'विदेशी दख़ल बर्दाश्त नहीं है.'
ताइवान का क्या मानना है?
बुधवार को ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने कहा कि उनका देश चीन की शर्तों के आधार पर कभी एकीकरण के लिए तैयार नहीं होगा.
जिनपिंग के भाषण से एक दिन पहले ताइवान की राष्ट्रपति ने कहा था कि चीन को ताइवान के अस्तित्व को स्वीकार करना चाहिए और मतभेदों को सुलझाने के लिए शांतिपूर्ण साधनों का उपयोग करना चाहिए.
साई ने कहा, "मैं चीन से कहना चाहती हूं कि वह ताइवान में चीनी गणराज्य के अस्तित्व की वास्तविकता का सामना करें."
उन्होंने कहा कि चीन को 2.3 करोड़ लोगों की स्वतंत्रता और लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए और शांतिपूर्ण तरीक़े से मतभेदों को सुलझाना चाहिए.
नवंबर में साई की राजनीतिक पार्टी को क्षेत्रीय चुनावों में भारी झटका लगा था. चीन मानता है कि यह उसके अलगाववादी रुख़ के कारण हुआ था.
क्या चीन और अमरीका के बीच छिड़ चुका है नया शीत युद्ध?
चीन की इस कंपनी से क्यों डर रहा है अमरीका
क्या है विवाद की वजह
'पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना' और 'रिपब्लिक ऑफ़ चाइना' एक-दूसरे की संप्रभुता को मान्यता नहीं देते. दोनों ख़ुद को आधिकारिक चीन मानते हुए मेनलैंड चाइना और ताइवान द्वीप का आधिकारिक प्रतिनिधि होने का दावा करते रहे हैं.
जिसे हम चीन कहते हैं उसका आधिकारिक नाम है 'पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना' और जिसे ताइवान के नाम से जानते हैं, उसका अपना आधिकारिक नाम है 'रिपब्लिक ऑफ़ चाइना.' दोनों के नाम में चाइना जुड़ा हुआ है.
व्यावहारिक तौर पर ताइवान ऐसा द्वीप है जो 1950 से ही स्वतंत्र रहा है. मगर चीन इसे अपना विद्रोही राज्य मानता है. एक ओर जहां ताइवान ख़ुद को स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र मानता है, वहीं चीन का मानना है कि ताइवान को चीन में शामिल होना चाहिए और फिर इसके लिए चाहे बल प्रयोग ही क्यों न करना पड़े
Friday, December 28, 2018
केंद्र सरकार ने चाइल्ड केयर लीव के नियम बदले, पुरुषों को भी मिलेगी 730 दिन की छुट्टी
केंद्र सरकार के ऐसे कर्मचारी जो एकल पिता की जिम्मेदारी निभा रहे हैं वो अपने सेवा काल के दौरान कुल 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव ले सकेंगे। अभी तक यह सुविधा सिर्फ महिला कर्मचारियों के लिए थी। सरकारी नोटिफिकेशन में एकल पिता को अविवाहित, विधुर या तलाकशुदा के रूप में परिभाषित किया गया है।
18 साल के कम उम्र के बच्चों की देखभाल के लिए मिलेगी सुविधा
7वें वेतन आयोग ने सिंगल मेल पेरेंट्स के लिए चाइल्ड केयर लीव की सिफारिश की थी। सरकार ने इसकी मंजूरी देते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह सुविधा उन पुरुष कर्मचारियों को मिलेगी जो सिंगल पेरेंट हैं या जिनके बच्चों की उम्र 18 साल से कम है।
डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) के आदेश के मुताबिक सरकारी महिला कर्मचारी और सिंगल मेल पेरेंट को संबंधित अथॉरिटी से 730 दिन की छुट्टियां मिलनी चाहिए। यह सर्विस पहले दो बच्चों की देखरेख, उनकी शिक्षा, बीमारी जरूरतों के लिए होनी चाहिए।
नए नियमों के तहत पहले 365 दिनों में 100% जबकि बाकी 365 दिन की छुट्टियों के दौरान 80% सैलरी देने का प्रावधान है। महिलाओं को चाइल्ड केयर लीव के अलावा 180 दिन की मैटरनिटी लीव भी मिलती है। लेकिन, पुरुषों के लिए सिर्फ 15 दिन की पैटरनिटी लीव का प्रावधान था।
कर्मचारियों के अर्जित अवकाश (ईएल) में भी संशोधन किया गया है। इसके मुताबिक जनवरी और जुलाई महीने के पहले ही दिन 5 एडवांस लीव उनके खाते में जोड़ दी जाएंगी।
दूसरे देशों में क्या है नियम?
अमेरिका में सवैतनिक अवकाश की सुविधा नहीं है। लेकिन, परिवार एवं चिकित्सा कानून 1993 के तहत कर्मचारी 12 हफ्ते का अवैतनिक अवकाश ले सकते हैं।
कैलिफोर्निया में 6 महीने का अवकाश लिया जा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में बच्चों की देखभाल के लिए 18 हफ्ते की छुट्टी ली जा सकती है।
अनुपम ने कहा- विरोध से प्रचार ही होगा
फिल्म पर लोगों की आपत्ति को लेकर अनुपम खेर से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘‘जितना वे विरोध करेंगे, फिल्म को उतना ही प्रचारित करेंगे। इस विषय पर किताब 2014 में ही आ गई थी तब कोई विरोध-प्रदर्शन नहीं किया गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जलियांवाला बाग या होलोकास्ट (द्वितीय विश्वयुद्ध के वक्त जर्मनी में हुआ नरसंहार) की घटना पर फिल्म बनाई जाए तो उसमें तथ्यों को नहीं बदला जा सकता।’’
महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस की आपत्ति पर खेर ने कहा, ‘‘हाल ही में राहुल गांधी जी का ट्वीट पढ़ा था, जिसमें उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी पर बोला था। ऐसे में मेरा मानना है कि उन्हें उन लोगों को डांटना चाहिए कि आप लाेग गलत काम कर रहे हो।’’
अनुपम ने यह भी कहा, ‘‘उनके (कांग्रेस) नेता पर फिल्म बनी है, उन्हें खुश होना चाहिए। आपको भीड़ लेकर भेजनी चाहिए फिल्म देखने के लिए, क्योंकि डायलॉग हैं उसमें। जैसे कि- मैं देश को बेचूंगा? जिससे लगता है कि कितने महान हैं मनमोहन सिंह जी’’
18 साल के कम उम्र के बच्चों की देखभाल के लिए मिलेगी सुविधा
7वें वेतन आयोग ने सिंगल मेल पेरेंट्स के लिए चाइल्ड केयर लीव की सिफारिश की थी। सरकार ने इसकी मंजूरी देते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह सुविधा उन पुरुष कर्मचारियों को मिलेगी जो सिंगल पेरेंट हैं या जिनके बच्चों की उम्र 18 साल से कम है।
डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) के आदेश के मुताबिक सरकारी महिला कर्मचारी और सिंगल मेल पेरेंट को संबंधित अथॉरिटी से 730 दिन की छुट्टियां मिलनी चाहिए। यह सर्विस पहले दो बच्चों की देखरेख, उनकी शिक्षा, बीमारी जरूरतों के लिए होनी चाहिए।
नए नियमों के तहत पहले 365 दिनों में 100% जबकि बाकी 365 दिन की छुट्टियों के दौरान 80% सैलरी देने का प्रावधान है। महिलाओं को चाइल्ड केयर लीव के अलावा 180 दिन की मैटरनिटी लीव भी मिलती है। लेकिन, पुरुषों के लिए सिर्फ 15 दिन की पैटरनिटी लीव का प्रावधान था।
कर्मचारियों के अर्जित अवकाश (ईएल) में भी संशोधन किया गया है। इसके मुताबिक जनवरी और जुलाई महीने के पहले ही दिन 5 एडवांस लीव उनके खाते में जोड़ दी जाएंगी।
दूसरे देशों में क्या है नियम?
अमेरिका में सवैतनिक अवकाश की सुविधा नहीं है। लेकिन, परिवार एवं चिकित्सा कानून 1993 के तहत कर्मचारी 12 हफ्ते का अवैतनिक अवकाश ले सकते हैं।
कैलिफोर्निया में 6 महीने का अवकाश लिया जा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में बच्चों की देखभाल के लिए 18 हफ्ते की छुट्टी ली जा सकती है।
अनुपम ने कहा- विरोध से प्रचार ही होगा
फिल्म पर लोगों की आपत्ति को लेकर अनुपम खेर से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘‘जितना वे विरोध करेंगे, फिल्म को उतना ही प्रचारित करेंगे। इस विषय पर किताब 2014 में ही आ गई थी तब कोई विरोध-प्रदर्शन नहीं किया गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जलियांवाला बाग या होलोकास्ट (द्वितीय विश्वयुद्ध के वक्त जर्मनी में हुआ नरसंहार) की घटना पर फिल्म बनाई जाए तो उसमें तथ्यों को नहीं बदला जा सकता।’’
महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस की आपत्ति पर खेर ने कहा, ‘‘हाल ही में राहुल गांधी जी का ट्वीट पढ़ा था, जिसमें उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी पर बोला था। ऐसे में मेरा मानना है कि उन्हें उन लोगों को डांटना चाहिए कि आप लाेग गलत काम कर रहे हो।’’
अनुपम ने यह भी कहा, ‘‘उनके (कांग्रेस) नेता पर फिल्म बनी है, उन्हें खुश होना चाहिए। आपको भीड़ लेकर भेजनी चाहिए फिल्म देखने के लिए, क्योंकि डायलॉग हैं उसमें। जैसे कि- मैं देश को बेचूंगा? जिससे लगता है कि कितने महान हैं मनमोहन सिंह जी’’
Wednesday, December 19, 2018
2011 में भारत को विश्वकप जिताने वाले कर्स्टन महिला टीम के कोच बनने की दौड़ में
महिला टीम के मुख्य कोच के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कुछ नामों को शॉर्ट लिस्ट किया है। इसमें दक्षिण अफ्रीका के गैरी कर्स्टन और हर्शल गिब्स और टीम के पूर्व कोच रमेश पोवार के नाम भी शामिल हैं। नए कोच के लिए इंटरव्यू गुरुवार से शुरू होंगे। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव, अंशुमन गायकवाड़, शांता रंगास्वामी इंटरव्यू पैनल में शामिल हैं।
28 लोगों ने किया था आवेदन
कोच के लिए कुल 28 लोगों ने आवेदन किए थे। कर्स्टन और गिब्स के अलावा दिमित्री मैस्कारेनहस, ब्रैड हॉग, ट्रैंट जॉनसन, डेव व्हॉटमोर, ओवैश शाह, कोलिन सिलर, डोमिनिक थोर्नेले का इंटरव्यू लिया जाएगा। वेंकटेश प्रसाद, मनोज प्रभाकर और वीवी रमन भी शॉर्ट लिस्ट किए गए हैं।
मिताली की शिकायत के बाद पोवार का नहीं बढ़ा था कार्यकाल
पिछले महीने वेस्टइंडीज में हुए महिला टी20 वर्ल्डकप में इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में मिताली राज को टीम में शामिल नहीं किया गया था। टीम वह मुकाबला हार गई थी। बाद में मिताली राज ने ट्वीट कर कोच रमेश पोवार पर अपमानित करने और करियर तबाह करने का आरोप लगाया था। इस कारण बीसीसीआई ने पोवार के कार्यकाल को नहीं बढ़ाया था। पोवार का कार्यकाल 30 नवंबर को खत्म हो चुका है।
बता दें कि बीते सप्ताह आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 35 अंक बढ़त के साथ 35,963 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 10, 805 पर रहा. गुरुवार को सेंसेक्स में 150.57 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और 35,929.64 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 53.95 अंकों की तेजी के साथ 10,791.55 पर बंद हुआ. बुधवार को सेंसेक्स 629 अंक बढ़कर 35779 के स्तर पर बंद हुआ. मंगलवार को सेंसेक्स 190 अंकों की बढ़त के साथ 35,150 के स्तर पर बंद हुआ. हालांकि सोमवार को सेंसेक्स 713.53 अंक यानी 2 फीसदी टूटकर 34,959.72 के स्तर पर रहा .
सीपीएम सांसद ई करीम ने 500 रूपये और एक हजार रुपये के पुराने नोट वापस लेने, नष्ट करने और नये नोट जारी करने पर रिजर्व बैंक की ओर से खर्च की गयी धनराशि साथ ही नोटबंदी के दौरान बैंकों में नोट बदलने वालों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा मांगा था. इसके जवाब में जेटली ने बताया कि रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद नये नोटों की छपाई पर हुआ व्यय अपनी लेखा रिपोर्ट में अलग से नहीं दर्शाया है.
28 लोगों ने किया था आवेदन
कोच के लिए कुल 28 लोगों ने आवेदन किए थे। कर्स्टन और गिब्स के अलावा दिमित्री मैस्कारेनहस, ब्रैड हॉग, ट्रैंट जॉनसन, डेव व्हॉटमोर, ओवैश शाह, कोलिन सिलर, डोमिनिक थोर्नेले का इंटरव्यू लिया जाएगा। वेंकटेश प्रसाद, मनोज प्रभाकर और वीवी रमन भी शॉर्ट लिस्ट किए गए हैं।
मिताली की शिकायत के बाद पोवार का नहीं बढ़ा था कार्यकाल
पिछले महीने वेस्टइंडीज में हुए महिला टी20 वर्ल्डकप में इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में मिताली राज को टीम में शामिल नहीं किया गया था। टीम वह मुकाबला हार गई थी। बाद में मिताली राज ने ट्वीट कर कोच रमेश पोवार पर अपमानित करने और करियर तबाह करने का आरोप लगाया था। इस कारण बीसीसीआई ने पोवार के कार्यकाल को नहीं बढ़ाया था। पोवार का कार्यकाल 30 नवंबर को खत्म हो चुका है।
बता दें कि बीते सप्ताह आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 35 अंक बढ़त के साथ 35,963 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 10, 805 पर रहा. गुरुवार को सेंसेक्स में 150.57 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और 35,929.64 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 53.95 अंकों की तेजी के साथ 10,791.55 पर बंद हुआ. बुधवार को सेंसेक्स 629 अंक बढ़कर 35779 के स्तर पर बंद हुआ. मंगलवार को सेंसेक्स 190 अंकों की बढ़त के साथ 35,150 के स्तर पर बंद हुआ. हालांकि सोमवार को सेंसेक्स 713.53 अंक यानी 2 फीसदी टूटकर 34,959.72 के स्तर पर रहा .
सीपीएम सांसद ई करीम ने 500 रूपये और एक हजार रुपये के पुराने नोट वापस लेने, नष्ट करने और नये नोट जारी करने पर रिजर्व बैंक की ओर से खर्च की गयी धनराशि साथ ही नोटबंदी के दौरान बैंकों में नोट बदलने वालों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा मांगा था. इसके जवाब में जेटली ने बताया कि रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद नये नोटों की छपाई पर हुआ व्यय अपनी लेखा रिपोर्ट में अलग से नहीं दर्शाया है.
Thursday, December 6, 2018
अगले 17 साल में सूरत की ग्रोथ दुनिया में सबसे तेज रहेगी, टॉप-10 में सभी शहर भारत के
साल 2019 से 2035 के बीच जो शहर सबसे तेज इकोनॉमिक ग्रोथ करेंगे उनमें टॉप-10 भारत के हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के ग्लोबल सिटीज रिसर्च में सूरत ग्रोथ में सबसे ऊपर है। उसकी औसत सालाना ग्रोथ 9.17% रहने की उम्मीद है। दूसरा नंबर आगरा (8.58%) का और तीसरा बेंगलुरु (8.5%) का है।
रिसर्च के मुताबिक भारतीय शहरों का इकोनॉमिक आउटपुट दूसरे देशों के महानगरों के मुकाबले कम रहेगा। वहीं, सभी एशियाई शहरों की कुल जीडीपी साल 2027 तक सभी उत्तरी अमेरिकी और यूरोपीय शहरों की जीडीपी से ऊपर निकल जाएगी। साल 2035 तक यह 17% ज्यादा हो जाएगी।
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिसर्च में सामने आया है कि साल 2035 तक दुनिया के बड़े शहरों की स्थिति में थोड़ा बदलाव होगा। न्यूयॉर्क, टोक्यो, लॉस एंजिल्स और लंदन टॉप 4 स्थानों पर बने रहंगे। लेकिन, शंघाई और बीजिंग, पेरिस और शिकागो को पीछे छोड़ देंगे। चीन के ग्वांगझू और शेनझेन भी टॉप-10 में शामिल हो जाएंगे।
रिसर्च में कहा गया है कि अफ्रीका में तंजानिया सबसे तेज ग्रोथ वाला शहर है। यूरोप में अरमेनियन की ग्रोथ सबसे तेज रहने की उम्मीद है। उत्तरी अमेरिका में सैन जोस सबसे ज्यादा विकास करेगा।
चैंबर ऑफ कॉमर्स पहली बार एनर्जी एक्सपो का 30 नवम्बर से 2 दिसंबर तक सरसाणा स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजन कर रहा है, जिसके उद्घाटन पर पहुंचे श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि सूरत आने पर मुझे एक व्यापारी ने कहा कि पूर्व में सूरत का व्यापार विश्वास पर चलता था, लेकिन अब विश्वास नहीं रहा। मैंने कहा कि कारोबार में उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं, अब ऊपर भी जाएगा व्यापार, भारत में संभावनाएं अधिक हैं।
इस मौके पर एनटीपीसी के चेयरमैन गुरुदीप सिंह, जिंबाब्वे के डेप्युटी मिनिस्टर ऑफ ट्रेड एंड कॉम र्स राजेश कुमार मोदी, रिन्युएबल एनर्जी प्रमोशन एसोसिएशन के अध्यक्ष एजी अय्यर, नई दिल्ली इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के चेयरमैन विश्व मोहन बंसल उपस्थित रहे। बीटूबी होने वाले इस एक्सपो का उद्देश्य यह है कि सूरत के उद्यमियों को यह दिखाना है कि आज की एनर्जी की दुनिया कैसी है?
अंतरराष्ट्रीय स्तर की एनर्जी कंपनी कैसे एनर्जी सेविंग करती हैं। कैसे एनर्जी उत्पादन की जाती है। इस एक्जीबिशन में सोलर एनर्जी के स्टॉल भी लगे। एनटीपीसी, एचपीसीएल, गेल सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर की वोटसिला, वास्को जैसी विदेशी संस्था भी शामिल हुई हैं। चैंबर अध्यक्ष हेतल मेहता ने बताया कि पहले ही दिन 1600 लोगों ने मुलाकात ली। ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल इसमें उपस्थित नहीं रहे।
रिसर्च के मुताबिक भारतीय शहरों का इकोनॉमिक आउटपुट दूसरे देशों के महानगरों के मुकाबले कम रहेगा। वहीं, सभी एशियाई शहरों की कुल जीडीपी साल 2027 तक सभी उत्तरी अमेरिकी और यूरोपीय शहरों की जीडीपी से ऊपर निकल जाएगी। साल 2035 तक यह 17% ज्यादा हो जाएगी।
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिसर्च में सामने आया है कि साल 2035 तक दुनिया के बड़े शहरों की स्थिति में थोड़ा बदलाव होगा। न्यूयॉर्क, टोक्यो, लॉस एंजिल्स और लंदन टॉप 4 स्थानों पर बने रहंगे। लेकिन, शंघाई और बीजिंग, पेरिस और शिकागो को पीछे छोड़ देंगे। चीन के ग्वांगझू और शेनझेन भी टॉप-10 में शामिल हो जाएंगे।
रिसर्च में कहा गया है कि अफ्रीका में तंजानिया सबसे तेज ग्रोथ वाला शहर है। यूरोप में अरमेनियन की ग्रोथ सबसे तेज रहने की उम्मीद है। उत्तरी अमेरिका में सैन जोस सबसे ज्यादा विकास करेगा।
चैंबर ऑफ कॉमर्स पहली बार एनर्जी एक्सपो का 30 नवम्बर से 2 दिसंबर तक सरसाणा स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजन कर रहा है, जिसके उद्घाटन पर पहुंचे श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि सूरत आने पर मुझे एक व्यापारी ने कहा कि पूर्व में सूरत का व्यापार विश्वास पर चलता था, लेकिन अब विश्वास नहीं रहा। मैंने कहा कि कारोबार में उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं, अब ऊपर भी जाएगा व्यापार, भारत में संभावनाएं अधिक हैं।
इस मौके पर एनटीपीसी के चेयरमैन गुरुदीप सिंह, जिंबाब्वे के डेप्युटी मिनिस्टर ऑफ ट्रेड एंड कॉम र्स राजेश कुमार मोदी, रिन्युएबल एनर्जी प्रमोशन एसोसिएशन के अध्यक्ष एजी अय्यर, नई दिल्ली इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के चेयरमैन विश्व मोहन बंसल उपस्थित रहे। बीटूबी होने वाले इस एक्सपो का उद्देश्य यह है कि सूरत के उद्यमियों को यह दिखाना है कि आज की एनर्जी की दुनिया कैसी है?
अंतरराष्ट्रीय स्तर की एनर्जी कंपनी कैसे एनर्जी सेविंग करती हैं। कैसे एनर्जी उत्पादन की जाती है। इस एक्जीबिशन में सोलर एनर्जी के स्टॉल भी लगे। एनटीपीसी, एचपीसीएल, गेल सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर की वोटसिला, वास्को जैसी विदेशी संस्था भी शामिल हुई हैं। चैंबर अध्यक्ष हेतल मेहता ने बताया कि पहले ही दिन 1600 लोगों ने मुलाकात ली। ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल इसमें उपस्थित नहीं रहे।
Monday, November 26, 2018
सेक्स के बारे में बच्चों से झूठ बोलना क्यों ख़तरनाक?
"बच्चों! आज हमारी एजुकेशन की क्लास है!" ये कहते हुए टीचर डस्टर उठाता है और ब्लैकबोर्ड पर लिखा 'सेक्स' शब्द मिटा देता है. बचता है तो सिर्फ़ " एजुकेशन". ब्लैकबोर्ड पर महिला और पुरुष के चित्र बने हैं और उनके जननांगों की जगह ख़ाली डिब्बा सा बना दिया गया है.
कुछ ऐसा ही दृश्य है 'ईस्ट इंडिया कॉमेडी' के बनाए एक वीडियो का. वीडियो बड़े ही मज़ाक़िया लहजे में भारत में सेक्स एजुकेशन व्यवस्था पर तंज़ करता है.
लेकिन कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती. उदाहरण अभी बाक़ी हैं मेरे दोस्त!
मिसालों की लिस्ट क़ायम है!
बच्चे का सवाल -"मम्मा, बच्चे कहां से आते हैं?"
उत्तर- "बेटा, आसमान से एक सुंदर सी परी आती है और बच्चों को मम्मा के पास रखकर चली जाती है."
बच्चे का सवाल -"डैडी, वो हिरोइन प्रेगनेंट कैसे हो गई?"
उत्तर-"बेटा, हीरो ने हिरोइन को किस किया ना. इसलिए वो प्रेगनेंट हो गई."
भारतीय घरों में ऐसी बातचीत सुनने को मिले तो हमारे कान ज़रा भी खड़े नहीं होते क्योंकि ये बिल्कुल आम है.
लेकिन इस 'आम बातचीत' का नतीजा कितना ख़तरनाक हो सकता है इसका अंदाज़ा डॉक्टर शारदा विनोद कुट्टी की एक फ़ेसबुक पोस्ट से बख़ूबी लगाया जा सकता है.
डॉ. शारदा ने कुछ दिनों पहले फ़ेसबुक पर एक वाक़या शेयर किया था, जो कुछ इस तरह था:
"आज मेरे पास 17 साल की एक लड़की आई. वो काफ़ी ग़रीब परिवार से थी. उसने मुझे बताया कि बॉयफ़्रेंड से सेक्स करने के बाद उसने आईपिल (गर्भ निरोधक दवा) ले ली है. वो बहुत घबराई हुई थी और मेरे सामने शर्मिंदा महसूस कर रही थी. वो मुझसे बार-बार कह रही थी ये बस एक बार हुई ग़लती है और दोबारा ये ग़लती नहीं होगी.
मैं उसे ये समझाने की कोशिश करती रही कि ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है. हर इंसान सेक्स करता है अगर इस मामले में कुछ ज़रूरी है तो वो है सुरक्षा. हमने अपनी बातचीत जारी रखी और आख़िरकार उसनें मुझे बताया कि उसे असल में पता ही नहीं है कि सेक्स होता कैसे है.
उसे ये भी नहीं पता था कि एक पुरुष का जननांग दिखता कैसा है. इसके बाद मैंने उसे सारी चीज़ें विस्तार से समझाई और चित्र बनाकर दिखाया कि असल में सेक्स कैसे होता है. सच्चाई ये थी कि उस लड़की ने सेक्स किया ही नहीं था. उसने अपने बॉयफ़्रेंड को सिर्फ़ किस किया था. हमारे यहां सेक्स एजुकेश की स्थिति इतनी ख़राब है कि उसे लगा कि किस करने से वो प्रेगनेंट हो जाएगी.
यहां तक कि उसने प्रेगनेंसी रोकने के लिए उसने गर्भनिरोधक दवा भी खा ली. ज़रा सोचिए कि हमने अपने बच्चों को किस क़दर अकेला छोड़ दिया है. सोचिए कि वो लड़की कितना बेहतर महसूस करती अगर उसके पास सही जानकारी होती और अगर वो एक ऐसे समाज में रह रही होती जहां उसे ग़लत न समझा जाता."
कुछ ऐसा ही दृश्य है 'ईस्ट इंडिया कॉमेडी' के बनाए एक वीडियो का. वीडियो बड़े ही मज़ाक़िया लहजे में भारत में सेक्स एजुकेशन व्यवस्था पर तंज़ करता है.
लेकिन कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती. उदाहरण अभी बाक़ी हैं मेरे दोस्त!
मिसालों की लिस्ट क़ायम है!
बच्चे का सवाल -"मम्मा, बच्चे कहां से आते हैं?"
उत्तर- "बेटा, आसमान से एक सुंदर सी परी आती है और बच्चों को मम्मा के पास रखकर चली जाती है."
बच्चे का सवाल -"डैडी, वो हिरोइन प्रेगनेंट कैसे हो गई?"
उत्तर-"बेटा, हीरो ने हिरोइन को किस किया ना. इसलिए वो प्रेगनेंट हो गई."
भारतीय घरों में ऐसी बातचीत सुनने को मिले तो हमारे कान ज़रा भी खड़े नहीं होते क्योंकि ये बिल्कुल आम है.
लेकिन इस 'आम बातचीत' का नतीजा कितना ख़तरनाक हो सकता है इसका अंदाज़ा डॉक्टर शारदा विनोद कुट्टी की एक फ़ेसबुक पोस्ट से बख़ूबी लगाया जा सकता है.
डॉ. शारदा ने कुछ दिनों पहले फ़ेसबुक पर एक वाक़या शेयर किया था, जो कुछ इस तरह था:
"आज मेरे पास 17 साल की एक लड़की आई. वो काफ़ी ग़रीब परिवार से थी. उसने मुझे बताया कि बॉयफ़्रेंड से सेक्स करने के बाद उसने आईपिल (गर्भ निरोधक दवा) ले ली है. वो बहुत घबराई हुई थी और मेरे सामने शर्मिंदा महसूस कर रही थी. वो मुझसे बार-बार कह रही थी ये बस एक बार हुई ग़लती है और दोबारा ये ग़लती नहीं होगी.
मैं उसे ये समझाने की कोशिश करती रही कि ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है. हर इंसान सेक्स करता है अगर इस मामले में कुछ ज़रूरी है तो वो है सुरक्षा. हमने अपनी बातचीत जारी रखी और आख़िरकार उसनें मुझे बताया कि उसे असल में पता ही नहीं है कि सेक्स होता कैसे है.
उसे ये भी नहीं पता था कि एक पुरुष का जननांग दिखता कैसा है. इसके बाद मैंने उसे सारी चीज़ें विस्तार से समझाई और चित्र बनाकर दिखाया कि असल में सेक्स कैसे होता है. सच्चाई ये थी कि उस लड़की ने सेक्स किया ही नहीं था. उसने अपने बॉयफ़्रेंड को सिर्फ़ किस किया था. हमारे यहां सेक्स एजुकेश की स्थिति इतनी ख़राब है कि उसे लगा कि किस करने से वो प्रेगनेंट हो जाएगी.
यहां तक कि उसने प्रेगनेंसी रोकने के लिए उसने गर्भनिरोधक दवा भी खा ली. ज़रा सोचिए कि हमने अपने बच्चों को किस क़दर अकेला छोड़ दिया है. सोचिए कि वो लड़की कितना बेहतर महसूस करती अगर उसके पास सही जानकारी होती और अगर वो एक ऐसे समाज में रह रही होती जहां उसे ग़लत न समझा जाता."
Subscribe to:
Posts (Atom)